Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

भोग की इच्छा रोग है और भोग दवा है, रोग पैदा करके दवा करने (दबाने) में रुचि करना विवेकी पुरुष का कर्त्तव्य नहीं है, रोग पैदा ही न हो, इससे बढ़कर स्वास्थ्य नहीं है, अतः तत्त्वज्ञान से इच्छा को दूर करो।

The desire for enjoyment is the disease and enjoyment is the medicine; it is not the duty of a discerning person to relish creating the disease and then medicating (suppressing) it. Let the disease not arise at all — there is no greater health than that; therefore remove desire through knowledge of reality.

— आराध्य सूत्र · #425

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक