Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

जब त्यागी हुए तब आत्म कल्याण के अतिरिक्त अन्य किसी कार्य का लक्ष्य नहीं बनाओ। लोग तो उद्धार, परोपकार और शुभोपयोग आदि शब्द कहकर राग की आग लगाकर अलग ही रहते हैं, जलना पड़ता है तुम्हें।

When you have become a renunciant, make no goal other than the welfare of your own soul. People, using words like 'upliftment,' 'benevolence' and 'auspicious activity,' kindle the fire of attachment and then stand apart, while it is you who has to burn.

— आराध्य सूत्र · #420

इसी विषय के और सूत्र

सभी अनासक्ति →
किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति