जिस प्रकार अग्नि से सन्तप्त स्वर्ण शुद्ध हो जाता है उसी प्रकार महान् पापों से कलंकित मनुष्य भी इस मन्त्र की ध्यानरूपी अग्नि के द्वारा सन्तप्त होकर शुद्धि को प्राप्त हो जाते हैं।
Just as gold heated by fire becomes pure, so too people stained by great sins, heated by the fire of meditation on this mantra, attain purity.
— आराध्य सूत्र · पार्श्वनाथ चरित · #169
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