कृत्वा पाप सहस्त्राणि हत्वा जन्तु शतानि च। अमुं मन्त्रं समाराध्य तिर्यञ्चोऽपि दिवङ्गतः॥
हजारों पाप करके तथा सैकड़ों जीवों को मार कर तिर्यञ्च भी इस मन्त्र की आराधना करके स्वर्ग को प्राप्त हुए हैं।
Having committed thousands of sins and killed hundreds of creatures, even animals have attained heaven by worshipping this mantra.
— आराध्य सूत्र · ज्ञानार्णव-आचार्य शुभचन्द्र · #137
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