Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ज्ञान

स्वाध्यायः परमः ताव,-जपः पञ्चनमस्कृतेः । पठनं व जिनेन्द्रोक्त शास्त्रयेकाग्र चेतसा ॥

एकाग्र चित्त से पञ्च नमस्कार का जाप करना अथवा जिनेन्द्रोक्त शास्त्र का पढ़ना दोनों परम स्वाध्याय हैं।

To recite the Five Salutations with a concentrated mind, or to read the scriptures spoken by the Jinendra—both are the supreme form of self-study (swadhyaya).

— आराध्य सूत्र · तत्त्वानुशासन-आचार्य नागसेन · #135

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